माँग न होने पर भी नए बिजलीघर क्‍यों?

मोदी सरकार की पहली सालगिरह की उपलब्धियों के शोर में यह दुखद खबर कहीं दब गई है कि देश में इस अप्रैल-मई की भीषण गर्मी के दौर में भी बिजली की माँग स्‍थापित क्षमता के मुकाबले मात्र आधी थी। इस कारण दर्जनों विद्युत संयंत्रों को बंद करना पड़ा है। ज्‍यादातर संयंत्रों को बंद करने का कारण रिजर्व शट-डाउन बताया गया है कि जिसका अर्थ होता है मांग की कमी के कारण बंद किया जाना। बंद कर दिए गए आधे से अधिक संयंत्रों का पानी की नली में रिसाव जैसा मामुली कारण दिया गया है जो अविश्‍वसनीय है क्‍योंकि इस प्रकार की खराबी जल्‍दी ही आसानी से सुधारी जा सकती है।

माँग में कमी के कारण बंद कर दिए गए बिजलीघरों की सूची में सारे बिजलीघर सार्वजनिक क्षेत्र के हैं जो संभवत: सस्‍ती बिजली पैदा करते हैं। लेकिन निजी बिजलीघर निर्बाध रुप से जारी हैं और राज्‍यों की विदयुत वितरण कंपनियाँ उनकी बिजली खरीद भी रही हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार देश की बिजली उत्‍पादन क्षमता 2,68,603 मेगावाट है जबकि मई माह की इस झुलसाती गर्मी में भी बिजली मांग मात्र 1,34,892 मेगावाट यानी कुल स्‍थापित क्षमता की आधी थी। याद रहे कि बिजली की सर्वाधिक माँग गर्मी के दिनों में होती है। इस वर्ष देश में भीषण गर्मी का दौर जारी है और मई के अंत तक गर्मी से मरने वालों का आँकड़ा 2200 को पार कर चुका था। लेकिन इस भीषण गर्मी के दौर में भी बिजली की माँग लगभग स्‍थिर ही बनी रहीं।

देश में बिजली की कमी का हौआ इक्‍कीसवी सदी की शुरुआत से बनाया जा रहा था। सरकार और कार्पोरेट द्वारा यह प्रचारित किया गया कि देश में बिजली की भारी कमी है और यह कमी देश की प्रगति में बाधक बनेगी और देश सुपर पॉवर बनने से वंचित हो जाएगा। इस तर्क के बल पर देशभर में किसानों का दमन करते हुए उनकी जमीनें जबरन छीनी गई और कई बिजली संयंत्र (ज्‍यादातर निजी) स्‍थापित किए गए। इसके लिए सरकारों ने कॉर्पोरेट घरानों को लाखों करोड़ की सब्सिडी बगैर गारंटी के कर्ज (इंटर कॉर्पोरेट डिपाजिट) दिए। केवल इतना ही निजी कंपनियों से ऐसे आत्‍मघाती बिजली खरीद समझौते कर लिए गए कि देश को सरकार-कॉर्पोरेट गठजोड़ का खामियाजा पीढ़ियों तक भुगतना पड़ेगा। इन बिजली खरीद समझौतों में बिजली की दरें भी ऊँची स्‍वीकार की गई है और  बिजली खरीदी की गारण्‍टी भी दी गई है।

बिजली खरीद समझौते की शर्तों के कारण ही महाराष्‍ट्र के दाभोल स्थित एनरॉन बिजली परियोजना से महाराष्‍ट्र सरकार को अत्‍यधिक महँगी बिजली खरीदने को बाध्‍य होना पड़ा था। अंत में परियोजना बंद करनी पड़ी और इसका सारा भार सरकार को वहन करना पड़ा क्‍योंकि परियोजना में लगाया गया अधिकांश धन सार्वजनिक क्षेत्र से लिया गया कर्ज था। उल्‍लेखनीय है कि एनरॉन परियोजना की स्‍वीकृति में कांग्रेस और भाजपा दोनों का योगदान रहा था। परियोजना पर बातचीत कांग्रेस को शासन काल में प्रारंभ हुई थी लेकिन इसे काउण्‍टर गारण्‍टी श्री अटलबिहारी वाजपेयी की 13 दिन की सरकार ने 1996 में दी थी। स्‍वदेशी की राजनीति करने वाले राष्‍ट्रवादी विचारधारा वाले श्री वाजपेयी ने बाद में विवादस्‍पद एनरॉन समझौते का समर्थन करने के अपने इस निर्णय को यह कहकर उचित ठहराया था कि देश के ऊर्जा क्षेत्र में तकनीक और बड़े निवेश की जरुरत है जो सिर्फ विदेश से ही आ सकती है।

व़र्तमान में बिजली की कम माँग होने के कारण सार्वजनिक क्षेत्र के बिजलीघरों को बंद कर दिया गया है और निजी बिजली संयंत्रों की बिजली खरीदी (कई बार महँगी) जा रही है।

1200 मेगावाट क्षमता वाले खण्‍डवा (मध्‍यप्रदेश) के सिंगाजी ताप बिजली संयंत्र के पहले चरण का उद्घाटन और 1320 मेगावाट के दूसरे चरण का शिलान्‍यास प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा 5 मार्च 2015 को किया गया। लेकिन कम माँग के कारण उद्घाटन के तुरंत बाद ही इसे बंद कर दिया गया। लेकिन, मध्‍यप्रदेश के सीधी (सासन) स्थित रिलायंस का थर्मल पॉवर प्रोजेक्‍ट चालू है और मध्‍यप्रदेश वितरण कंपनी इससे बिजली खरीद रही है। मीडिया में खबरें आने के बाद सिंगाजी ताप बिजलीघर को एक बार कम क्षमता से प्रारंभ किया गया था।

DB 31 May 2015 Singaji Power Plant

Photo Source – Dainik Bhaskar, Khandwa Edition, 31 May 2015

सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना की लागत 7,820 करोड़ रुपये आई है जबकि इसके दूसरे चरण की लागत 6,500 करोड़ बताई गई है। श्री मोदी के अनुसार यह विद्युत संयंत्र औसत लागत से कम में बनाया गया है।

श्री मोदी ने सिंगाजी बिजली संयंत्र का उद्घाटन करते समय बिजली को विकास की कुंजी बताते हुए सभी को बिजली उपलबध करवाने की बचनबध्‍दता दर्शाई थी। उन्‍होंने यह दावा भी किया था कि उनके तब तक के 9-10 माह के कार्यकाल में बिजली उत्‍पादन 11 प्रतिशत बढ़ा है।

केंद्रीय बिजली और कोयला मंत्री पीयूष गोयल ने 27 मई 2015 को मोदी सरकार की पहले वर्ष की उपलब्धियॉं गिनाते हुए कहा कि पिछले एक साल में 22,566 मेगावॉट बिजली क्षमता जोड़ी गई है।

अब सवाल उठता है कि देश में सर्वाधिक जरुरत के समय भी यदि बिजली की  मांग उसकी उत्‍पादन क्षमता से आधी ही है तो फि‍र नए बिजलीघर बनाने की क्‍या जरुरत है? नए बनाए जा रहे है (या आवश्‍यकता से अधिक बनाए जा चुके) बिजलीघर  देश पर बोझ नहीं है? इन बिजलीघरों के निर्माण में लगने वाले संसाधन सामाजिक विकास के क्षेत्रों में खर्च नहीं किए जा सकते? यदि नए बनने वाले विद्युत संयंत्र निजी क्षेत्र के हैं तो विद्युत क्रय समझौतों के कारण इसकी कीमत लम्‍बे समय तक नहीं चुकानी होंगी?

संभव है सरकार देश में विद्युत क्षमता बढ़ाने की अपनी इस उपलब्धि को भविष्‍य में भी जारी रखेगी। लेकिन, इसके प्रभावों के प्रति सतर्क रहने की जरुरत है।

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सिंगाजी ताप विद्युत संयंत्र के उद्घाटन में किसने क्‍या कहा

बिजली के उत्पादन को बढ़ाना और इसकी कमी को तेजी से पूरा करना हमारी प्राथमिकता है। देश के हर कोने में नये ऊर्जा संयंत्र स्थापित किये जा रहे हैं। बीते दस माह में विद्युत उत्पादन में 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह इस बात का उदाहरण है कि विकास किस तेजी से किया जा सकता है। ……… मध्यप्रदेश में जब भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी थी उस समय जितनी बिजली उत्पादित होती थी उतनी अब केवल संत श्री सिंगाजी परियोजना से उत्पादित होगी। हम देश में कम लागत में सस्ती ऊर्जा का क्षेत्र तैयार करने के प्रयास कर रहे हैं। इसके लिये परमाणु ऊर्जा संयंत्र के प्रयास किये जा रहे हैं।

– श्री नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

मध्यप्रदेश अब ऊर्जा उत्पादन में आत्म-निर्भर हो गया है। अगले दो साल में 20 हजार मेगावाट ऊर्जा राज्य में पैदा होगी। जरूरतमंद राज्यों को देने में भी प्रदेश सक्षम होगा।

– श्री शिवराजसिंह चौहान, मुख्‍यमंत्री-मध्‍यप्रदेश

संदर्भ
दैनिक भास्कर, 16 मई 2015
http://epaper.bhaskar.com/detail/?id=779797&boxid=51632012789&ch=mpcg&map=map&currentTab=tabs-1&pagedate=05/16/2015&editioncode=362&pageno=4&view=image

दि इण्डियन एक्सप्रेस, 26 मई 2015
http://indianexpress.com/article/india/india-others/slowdown-signal-heat-is-on-but-power-demand-flat/

दैनिक भास्कर, 26 मई 2015
http://epaper.bhaskar.com/detail/?id=785885&boxid=52635938672&ch=mpcg&map=map&currentTab=tabs-1&pagedate=05/26/2015&editioncode=362&pageno=1&view=image

इण्डिया रिसोर्स
http://www.indiaresource.org/issues/energycc/2003/enronsagaalesson.html

बिजनेस स्टेण्डर्ड, ऑनलाईन संस्करण, 27 मई 2015
http://hindi.business-standard.com/storypage.php?autono=103133

श्री नरेन्द्र मोदी की वेबसाईट
http://www.narendramodi.in/pms-remarks-on-the-occasion-of-dedication-to-the-nation-of-stage-1-of-shree-singaji-thermal-power-plant-at-khandwa

मध्‍यप्रदेश सरकारी की सूचना प्रकाशन विभाग की वेबसाईट पर 5 मार्च 2015 को जारी बयान
http://mpinfo.org/